छठ पूजा: सूर्य उपासना से मिलता है आरोग्य और शक्ति, जानें क्यों होती है डूबते और उगते सूर्य की पूजा।

सूर्य देव के प्रति कृतज्ञता (Gratitude to Surya Dev)

छठ पूजा का सबसे मुख्य कारण सूर्य देव को धन्यवाद देना है।

  • जीवन का आधार: सूर्य पृथ्वी पर जीवन, ऊर्जा, स्वास्थ्य और प्रकाश का सबसे बड़ा स्रोत हैं। छठ पूजा के माध्यम से भक्त सूर्य देव के प्रति अपनी कृतज्ञता (आभार) व्यक्त करते हैं, क्योंकि उनकी ऊर्जा से ही सृष्टि का पालन संभव है।
  • आरोग्य और समृद्धि: यह माना जाता है कि सूर्य देव की उपासना करने से असाध्य रोगों से मुक्ति मिलती है और परिवार में सुख-समृद्धि आती है।
  • डूबते और उगते सूर्य की पूजा: यह पर्व दुनिया में अनोखा है क्योंकि इसमें डूबते (संध्या अर्घ्य) और उगते (उषा अर्घ्य), दोनों सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। डूबते सूर्य की पूजा जीवन के उतार-चढ़ाव को स्वीकार करने और आने वाले कल की आशा का प्रतीक है।

2. छठी मैया की उपासना (Worship of Chhathi Maiya)

सूर्य देव के साथ, उनकी बहन छठी मैया की भी पूजा की जाती है।

  • संतान की रक्षा: छठी मैया को संतान और स्वास्थ्य की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। महिलाएं यह व्रत मुख्य रूप से संतान प्राप्ति, उनकी दीर्घायु और सुखी जीवन की कामना से रखती हैं।
  • पौराणिक मान्यता: मार्कण्डेय पुराण के अनुसार, छठी मैया प्रकृति के छठे अंश से उत्पन्न हुई हैं और बच्चों की रक्षा करती हैं।

 

3. पौराणिक कथाएँ और ऐतिहासिक महत्व

छठ पूजा का इतिहास वेदों और पुराणों में भी मिलता है। इससे जुड़ी कुछ प्रमुख कथाएँ हैं:

  • रामायण काल: मान्यता है कि भगवान राम और माता सीता ने लंका विजय के बाद अयोध्या में राज्याभिषेक के दिन कार्तिक शुक्ल षष्ठी को सूर्य देव की उपासना की थी।
  • महाभारत काल:
    • माना जाता है कि सूर्य पुत्र कर्ण प्रतिदिन कमर तक पानी में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य देते थे, जिससे उन्हें अपार बल और तेज प्राप्त हुआ।
    • पांडवों के कठिन समय में द्रौपदी ने भी छठ का व्रत किया था, जिससे उन्हें शक्ति और समृद्धि मिली।

4. सादगी, शुद्धता और अनुशासन (Purity & Discipline)

यह पर्व कठिन तप और भक्ति का प्रतीक है।

  • छठ का व्रत 36 घंटे का निर्जला (बिना जल के) होता है, जिसमें व्रती पूर्ण शुद्धता और कठोर नियमों का पालन करते हैं।
  • यह पर्व सादगी, पवित्रता, अनुशासन और प्रकृति के प्रति समर्पण का संदेश देता है। इसमें सभी वर्ग के लोग एक साथ नदियों और तालाबों के घाटों पर सूर्य की आराधना करते हैं, जो सामाजिक समरसता का उदाहरण है।

संक्षेप में, छठ पूजा सूर्य की ऊर्जा के प्रति आभार, छठी मैया से संतान और परिवार के कल्याण की कामना, और प्रकृति के प्रति सम्मान प्रकट करने का महापर्व है।

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