भारत की सुरक्षा में निजी क्षेत्र का प्रवेश: मिसाइल और गोला-बारूद उत्पादन से हटा सरकारी एकाधिकार

नई दिल्ली: रक्षा मंत्रालय ने एक अभूतपूर्व नीतिगत सुधार करते हुए मिसाइल और गोला-बारूद के विकास और निर्माण के दरवाजे निजी क्षेत्र के लिए खोल दिए हैं। यह ऐतिहासिक कदम दशकों से चले आ रहे सरकारी एकाधिकार को समाप्त करता है और ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल के तहत देश की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है।

इस निर्णय का मुख्य उद्देश्य युद्ध की लंबी अवधि के दौरान सेना के लिए हथियारों और मारक क्षमता की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना है। यह कदम ‘ऑपरेशन सिंदूर’ जैसे हालिया अनुभवों से भी प्रेरित है, जिसने आधुनिक युद्ध में लम्बी दूरी के पारंपरिक मिसाइलों और स्टैंड-ऑफ हथियारों के बढ़ते महत्व को रेखांकित किया है।


 

नीतिगत बदलाव और निहितार्थ

 

मंत्रालय द्वारा राजस्व खरीद नियमावली (RPM) में किए गए संशोधन ने निजी कंपनियों के लिए उत्पादन प्रक्रिया को सरल बना दिया है। अब निजी संस्थाओं को गोला-बारूद निर्माण इकाई स्थापित करने के लिए सरकारी स्वामित्व वाली म्यूनिशंस इंडिया लिमिटेड (MIL) से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) लेना अनिवार्य नहीं होगा।

इस छूट के बाद, निजी कंपनियां अब एक व्यापक रेंज के आयुधों का निर्माण कर सकेंगी, जिनमें शामिल हैं:

  • आर्टिलरी शेल (जैसे 105 मिमी, 130 मिमी, और 150 मिमी)
  • पिनाका मिसाइल
  • 1000 पाउंड बम
  • मोर्टार बम और हैंड ग्रेनेड
  • मध्यम और छोटे कैलिबर के गोला-बारूद

इसके अलावा, रक्षा मंत्रालय ने रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) को भी संकेत दिया है कि मिसाइल विकास और एकीकरण का क्षेत्र भी निजी खिलाड़ियों के लिए खोला जाएगा, जो अब तक मुख्य रूप से भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) जैसे सरकारी उपक्रमों तक ही सीमित था।


 

आत्मनिर्भरता और वैश्विक संदर्भ

 

यह नीतिगत बदलाव भारत की रक्षा विनिर्माण रणनीति में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन को दर्शाता है। वैश्विक स्तर पर यूक्रेन और गाजा जैसे संघर्षों के कारण सैन्य आपूर्तियों में उत्पन्न तनाव के बीच, घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने का यह निर्णय राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक मजबूत और लचीली आपूर्ति श्रृंखला सुनिश्चित करेगा।

निजी क्षेत्र की भागीदारी से न केवल उत्पादन क्षमता बढ़ेगी, बल्कि यह रक्षा क्षेत्र में नवाचार और तकनीकी प्रगति को भी बढ़ावा देगा। यह भारत को सिर्फ आयातक नहीं, बल्कि एक प्रमुख वैश्विक रक्षा उत्पादक के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक निर्णायक कदम है।

संक्षेप में, यह नई नीति भारत के रक्षा उद्योग को एक नए युग में ले जाने के लिए तैयार है, जहां निजी उद्योग देश की सुरक्षा तैयारी और ‘आत्मनिर्भरता’ के मिशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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