लद्दाख प्रशासन ने 24 सितंबर को लेह में हुए हिंसक प्रदर्शनों और पुलिस कार्रवाई के दौरान हुई चार मौतों की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए हैं।
पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की पत्नी, गीतांजलि जे. अंगमो, ने उनकी गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है।
लेह में विरोध-प्रदर्शनों के हिंसक हो जाने के बाद पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अपना 15 दिन से चल रहा अनशन (भूख हड़ताल) समाप्त कर दिया। उनके इस निर्णय को परिपक्वता और उच्च नैतिक जिम्मेदारी के कार्य के रूप में देखा गया।
अनशन समाप्त करने के मुख्य कारण और उनका रुख:
- हिंसा को रोकना: वांगचुक ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य लद्दाख के लिए शांतिपूर्ण और गांधीवादी तरीके से अपनी मांगें रखना था। लेह में बड़े पैमाने पर हिंसा, आगजनी और झड़पों के बाद, उन्होंने तुरंत अपने समर्थकों से हिंसा रोकने की अपील की।
- उद्देश्य की सुरक्षा: उन्होंने कहा कि हिंसा उनके आंदोलन के मूल उद्देश्य (लद्दाख के लिए राज्य का दर्जा और संविधान की छठी अनुसूची को लागू करना) को नुकसान पहुंचा सकती है।
- नैतिक जिम्मेदारी: उन्होंने दुख व्यक्त किया कि उनके विरोध के समर्थन में लोगों की जान चली गई या वे घायल हुए। उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर लोगों की जान जोखिम में है तो अनशन जारी रखना अर्थहीन होगा, जो नैतिक जिम्मेदारी को दर्शाता है।
- शांति का आह्वान: अनशन तोड़ने के बाद, उन्होंने युवाओं से शांति बनाए रखने और सरकार से संवेदनशील होने तथा जल्द से जल्द बातचीत शुरू करने का आग्रह किया।
वांगचुक के अनशन को समाप्त करने के इस कदम को स्थिति को और बिगड़ने से रोकने की दिशा में एक जिम्मेदार फैसला माना गया।
लद्दाख प्रशासन ने 24 सितंबर को लेह में हुए हिंसक प्रदर्शनों और पुलिस कार्रवाई के दौरान हुई चार मौतों की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए हैं।
जांच का विवरण
- जांच का आदेश: लद्दाख प्रशासन ने 24 सितंबर को हुई हिंसा की मजिस्ट्रेट जांच का आदेश दिया, जिसमें प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की गोलीबारी में चार नागरिकों की मौत हो गई थी।
- जांच अधिकारी: नुब्रा के उप-मंडल मजिस्ट्रेट (SDM) मुकुल बेनीवाल को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है।
- जांच के उद्देश्य: जांच का मुख्य उद्देश्य उन विस्तृत तथ्यों और परिस्थितियों का पता लगाना है जिनके कारण गंभीर कानून-व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न हुई, पुलिस कार्रवाई हुई और परिणामस्वरूप चार व्यक्तियों की मौत हुई।
- रिपोर्ट की समय-सीमा: जांच अधिकारी को चार सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट जमा करने का आदेश दिया गया है।
- जनता की भागीदारी: जांच के लिए 4 से 18 अक्टूबर के बीच आम जनता से मौखिक या लिखित गवाही और साक्ष्य (फोटो या वीडियो रिकॉर्डिंग) आमंत्रित किए गए हैं।
स्थानीय संगठनों का रुख
लेह एपेक्स बॉडी (LAB) और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) जैसे स्थानीय संगठनों ने प्रशासन द्वारा दिए गए इस मजिस्ट्रेट जांच को खारिज कर दिया है। उनकी मुख्य मांग किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश द्वारा निष्पक्ष न्यायिक जांच कराने की है।
पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की पत्नी, गीतांजलि जे. अंगमो, ने उनकी गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। हालांकि, याचिका पर सुनवाई की निश्चित तारीख अभी स्पष्ट नहीं है, क्योंकि सर्वोच्च न्यायालय वर्तमान में दशहरे की छुट्टी पर है और 6 अक्टूबर को फिर से खुलेगा। वकीलों के सोमवार (6 अक्टूबर) को तत्काल सुनवाई के लिए कोर्ट से आग्रह करने की संभावना है।
याचिका का विवरण
गीतांजलि जे. अंगमो ने 2 अक्टूबर, 2025 की शाम को सुप्रीम कोर्ट में यह याचिका (रिट याचिका) दायर की है।
याचिका के मुख्य बिंदु:
- हिरासत को चुनौती: याचिका मुख्य रूप से राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत सोनम वांगचुक की हिरासत को चुनौती देती है। उन्हें 26 सितंबर को गिरफ्तार किया गया था और वर्तमान में वे जोधपुर जेल में बंद हैं।
- बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus): यह याचिका अनुच्छेद 32 के तहत दायर की गई एक बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका है, जिसमें कोर्ट से सोनम वांगचुक को तत्काल रिहा करने की मांग की गई है।
- अवैध और असंवैधानिक हिरासत: याचिका में आरोप लगाया गया है कि वांगचुक की हिरासत अवैध, मनमानी और असंवैधानिक है, जो संविधान के अनुच्छेद 14, 19, 21 और 22 के तहत गारंटीकृत मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करती है।
- हिरासत आदेश की प्रति: गीतांजलि अंगमो ने आरोप लगाया है कि उन्हें और उनके परिवार को हिरासत के आधार या आदेश की प्रति अभी तक नहीं दी गई है, जो नियमों का उल्लंघन है।
- तत्काल रिहाई की मांग: याचिका में अदालत से वांगचुक को तुरंत कोर्ट के सामने पेश करने और उनकी तत्काल रिहाई का आदेश देने का आग्रह किया गया है।

