नई दिल्ली, 27 सितंबर 2025: एशिया कप 2025 के हाई-वोल्टेज मुकाबले में भारत और पाकिस्तान के बीच मैदान पर उतरी टेंशन अब ड्रेसिंग रूम से बाहर निकलकर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) के दफ्तर तक पहुंच गई है। भारतीय टीम के कप्तान सूर्यकुमार यादव को आईसीसी ने मैच के बाद की गई ‘पहलगाम ट्रिब्यूट’ वाली टिप्पणियों के लिए 30 प्रतिशत मैच फीस का जुर्माना लगाया है। यह फैसला मैच रेफरी रिची रिचर्डसन द्वारा सुनवाई के बाद लिया गया, लेकिन भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने इसे चुनौती देने का ऐलान कर दिया है। इस घटना ने क्रिकेट की दुनिया में नई बहस छेड़ दी है, जहां खेल और राजनीति की सीमाएं फिर से धुंधली नजर आ रही हैं।
मैच का बैकग्राउंड: भारत-पाकिस्तान का रोमांचक मुकाबला
एशिया कप 2025 के सुपर फोर स्टेज में भारत और पाकिस्तान के बीच खेला गया मैच पहले से ही सुर्खियों में था। दोनों टीमों के बीच की राइवलरी जगजाहिर है, और इस बार मैदान पर पाकिस्तानी तेज गेंदबाज हारिस रऊफ और भारतीय बल्लेबाज सूर्यकुमार यादव के बीच गर्मागर्मी देखने को मिली। मैच के दौरान रऊफ की कुछ हरकतों पर सूर्यकुमार ने प्रतिक्रिया दी, जिसके बाद पोस्ट-मैच प्रेस कॉन्फ्रेंस में सूर्यकुमार ने ‘पहलगाम’ का जिक्र किया। पहलगाम, जो जम्मू-कश्मीर का एक खूबसूरत पर्यटन स्थल है, लेकिन हाल के वर्षों में वहां हुई कुछ घटनाओं के कारण संवेदनशील मुद्दा बन चुका है। सूर्यकुमार ने अपनी टिप्पणी में इसे एक ‘ट्रिब्यूट’ के रूप में पेश किया, लेकिन पाकिस्तान टीम ने इसे राजनीतिक करार देकर आईसीसी से शिकायत की।
मैच में भारत ने पाकिस्तान को हराकर जीत दर्ज की, लेकिन जीत की खुशी ज्यादा देर नहीं टिकी। सूर्यकुमार की टिप्पणी ने विवाद को जन्म दिया, और आईसीसी ने तुरंत जांच शुरू कर दी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सूर्यकुमार ने कहा था, “यह जीत उन लोगों को समर्पित है जो पहलगाम जैसे स्थानों पर शांति की कामना करते हैं।” यह बयान पाकिस्तान की ओर से राजनीतिक रूप से संवेदनशील माना गया, क्योंकि पहलगाम क्षेत्र में हालिया हमलों का जिक्र किया जा रहा था।
आईसीसी का फैसला: जुर्माना और चेतावनी
आईसीसी के कोड ऑफ कंडक्ट के तहत, खिलाड़ियों को राजनीतिक या संवेदनशील मुद्दों पर टिप्पणी करने से रोका जाता है, खासकर जब यह मैच के दौरान या उसके तुरंत बाद हो। मैच रेफरी रिची रिचर्डसन ने दोनों पक्षों की सुनवाई की, जिसमें सूर्यकुमार यादव के अलावा पाकिस्तानी खिलाड़ी हारिस रऊफ और फरहान को भी शामिल किया गया। नतीजा यह निकला कि सूर्यकुमार और रऊफ दोनों पर 30 प्रतिशत मैच फीस का जुर्माना लगाया गया, जबकि फरहान को सिर्फ चेतावनी दी गई।
आईसीसी की ओर से जारी बयान में कहा गया, “खिलाड़ियों की जिम्मेदारी है कि वे खेल को राजनीति से दूर रखें। सूर्यकुमार की टिप्पणी कोड ऑफ कंडक्ट के आर्टिकल 2.8 का उल्लंघन मानी गई, जो खिलाड़ियों को अनुचित टिप्पणियों से रोकता है।” यह फैसला शुक्रवार को घोषित किया गया, और तुरंत ही सोशल मीडिया पर ट्रेंड करने लगा।
भारत की अपील: बीसीसीआई का मजबूत स्टैंड
बीसीसीआई ने आईसीसी के फैसले को अस्वीकार करते हुए अपील दायर करने का फैसला किया है। बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “सूर्यकुमार की टिप्पणी किसी राजनीतिक एजेंडे से प्रेरित नहीं थी। यह सिर्फ एक भावनात्मक ट्रिब्यूट था, जो शांति और एकता की बात करता है। हम आईसीसी से इस फैसले की समीक्षा की मांग करेंगे।” रिपोर्ट्स बताती हैं कि भारत की अपील में यह तर्क दिया जाएगा कि टिप्पणी मैच के संदर्भ में थी और किसी देश या व्यक्ति को निशाना नहीं बनाती थी।
इस बीच, पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) ने आईसीसी के फैसले का स्वागत किया है। पीसीबी के एक प्रवक्ता ने कहा, “क्रिकेट को राजनीति से अलग रखना चाहिए। हम खुश हैं कि आईसीसी ने निष्पक्षता दिखाई।”
क्रिकेट जगत की प्रतिक्रियाएं: समर्थन और आलोचना
इस घटना ने क्रिकेट कमेंटेटर्स और पूर्व खिलाड़ियों को दो खेमों में बांट दिया है। पूर्व भारतीय कप्तान विराट कोहली ने सोशल मीडिया पर सूर्यकुमार का समर्थन करते हुए लिखा, “खेल भावना से ऊपर कुछ नहीं। सूर्या ने सिर्फ अपने दिल की बात कही।” वहीं, पाकिस्तानी पूर्व तेज गेंदबाज शोएब अख्तर ने कहा, “मैदान पर लड़ाई होनी चाहिए, लेकिन राजनीति नहीं। आईसीसी का फैसला सही है।”
सोशल मीडिया पर #JusticeForSurya और #ICCBias जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं। फैंस का एक तबका आईसीसी पर भारत विरोधी होने का आरोप लगा रहा है, जबकि दूसरे इसे खेल की पवित्रता की जीत बता रहे हैं।
आगे क्या? एशिया कप पर असर
एशिया कप 2025 अभी जारी है, और यह विवाद टूर्नामेंट के माहौल को प्रभावित कर सकता है। अगर अपील खारिज हुई, तो सूर्यकुमार पर आगे की कार्रवाई भी हो सकती है, लेकिन फिलहाल टीम का फोकस जीत पर है।
यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि भारत-पाकिस्तान मैच सिर्फ खेल नहीं, बल्कि भावनाओं का समंदर है। क्या आईसीसी का फैसला क्रिकेट को साफ-सुथरा बनाएगा, या विवादों को और हवा देगा? समय बताएगा।


