वृंदावन के संत प्रेमानंद जी महाराज: भक्ति, बीमारी और भक्तों का अथाह प्रेम

वृंदावन की पवित्र धरती पर विराजमान संत प्रेमानंद जी महाराज आज भले ही शारीरिक रूप से कमजोर हो गए हों, लेकिन उनकी आत्मा अब भी प्रेम और भक्ति की वही रोशनी फैला रही है, जिसने करोड़ों हृदयों को छुआ है। लगभग दो दशक से चल रही किडनी की बीमारी ने अब उन्हें पूरी तरह कमजोर कर दिया है। डॉक्टरों के अनुसार, उन्हें पॉलीसिस्टिक किडनी डिजीज (PKD) नामक एक जन्मजात रोग है, जिसके कारण वे अब पूरी तरह किडनी फेल्योर की स्थिति में हैं।

हर दिन की डायलिसिस, थकान और दर्द के बावजूद, उनके चेहरे पर वही दिव्य मुस्कान आज भी कायम है। भक्तों का प्रेम इतना गहरा है कि सैकड़ों लोग अपनी किडनी दान करने की इच्छा व्यक्त कर चुके हैं — परंतु प्रेमानंद जी ने बड़े स्नेह से सभी प्रस्ताव ठुकरा दिए, यह कहते हुए कि “मैं किसी और को कष्ट देकर अपना जीवन नहीं बढ़ा सकता।”

कानपुर में अनिरुद्ध कुमार पांडेय के रूप में जन्मे प्रेमानंद जी ने 13 वर्ष की आयु में ही संसार त्याग दिया और वृंदावन में राधावल्लभी संप्रदाय से जुड़कर राधा-कृष्ण भक्ति में लीन हो गए। उनका जीवन सरलता, संयम और समर्पण का प्रतीक रहा है।

आज उनके भक्तों में आमजन ही नहीं, बल्कि सेलिब्रिटीज भी शामिल हैं — विराट कोहली, अनुष्का शर्मा, हेमा मालिनी, अशुतोष राणा और यूट्यूबर एल्विश यादव तक उनके आशीर्वाद के लिए वृंदावन पहुंच चुके हैं। सोशल मीडिया और यूट्यूब ने उनकी शिक्षाओं को घर-घर तक पहुंचाया है।

कुछ समय पहले तक वे रोज़ रात के 2 बजे पदयात्रा पर निकलते थे — और हजारों भक्त उनके दर्शन के लिए उमड़ पड़ते थे। अब स्वास्थ्य कारणों से वह यात्रा रुकी है, लेकिन उनकी वाणी आज भी भक्तों के हृदयों में गूंजती है —
“प्रेम ही ईश्वर तक पहुँचने का मार्ग है, बाकी सब माया है।”

आज जब पूरी दुनिया उनके स्वास्थ्य के लिए प्रार्थना कर रही है — यहां तक कि मदीना से भी दुआएं उठ रही हैं — प्रेमानंद जी महाराज अपने भक्तों को एक ही संदेश दे रहे हैं:
“भक्ति में विश्वास रखो, भय में नहीं।”

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