भाई दूज (Bhai Dooj) का पर्व भाई-बहन के अटूट प्रेम, स्नेह और विश्वास को समर्पित है। यह दीपावली के पाँच दिवसीय उत्सव का अंतिम दिन होता है, जिसे कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि पर ‘यम द्वितीया’ के नाम से भी जाना जाता है।
इस पावन पर्व को मनाने के दो मुख्य कारण हैं, जो भाई-बहन के रिश्ते को सुरक्षा और दीर्घायु का आशीर्वाद प्रदान करते हैं:
1. पौराणिक कथा: यमराज और यमुनाजी का वरदान
भाई दूज को यम द्वितीया भी कहा जाता है, जिसके पीछे मृत्यु के देवता यमराज और उनकी बहन यमुनाजी की कथा है।
- कथा का सार: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यमराज अपनी बहन यमुना के आग्रह पर कार्तिक शुक्ल द्वितीया तिथि को उनके घर पहुँचे थे। यमुना ने प्रेमपूर्वक उनका स्नान, तिलक और भव्य भोजन से सत्कार किया। बहन के इस निस्वार्थ प्रेम से प्रसन्न होकर यमराज ने यमुनाजी को वरदान दिया।
- वरदान: यमराज ने यह वरदान दिया कि जो भाई इस तिथि पर अपनी बहन के घर जाएगा, उसका तिलक स्वीकार करेगा और उसके हाथों का भोजन ग्रहण करेगा, उसे यम (अकाल मृत्यु) का भय नहीं सताएगा और वह दीर्घायु प्राप्त करेगा।
- महत्व: इस कथा के कारण, बहनें आज के दिन यमराज की पूजा भी करती हैं, ताकि उनके भाई को लंबी उम्र का आशीर्वाद मिले।
2. पवित्र बंधन और संकल्प की परंपरा
यह पर्व भाई और बहन के रिश्ते को आत्मिक रूप से सुदृढ़ करता है। दोनों ही एक-दूसरे के प्रति अपने कर्तव्य और प्रेम का संकल्प दोहराते हैं।
- बहन की भूमिका (आशीर्वाद): बहनें अपने भाई के माथे पर रोली और अक्षत का तिलक लगाती हैं। यह तिलक केवल एक रस्म नहीं, बल्कि भाई के सुख, समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य के लिए किया गया गहरा आशीर्वाद और शुभकामना का प्रतीक होता है।
- भाई की भूमिका (रक्षा का वचन): तिलक करवाने के बाद भाई अपनी बहन को उपहार देकर उनका सम्मान करता है। इसके साथ ही वह जीवनभर अपनी बहन की रक्षा करने और उसका साथ देने का वचन दोहराता है।
- अन्य मान्यता: एक अन्य कथा के अनुसार, जब भगवान कृष्ण अत्याचारी नरकासुर का वध कर लौटे, तो उनकी बहन सुभद्रा ने उनका स्वागत तिलक और मिठाइयों से किया था। यह घटना भी भाई-बहन के अटूट स्नेह और स्वागत-सत्कार की परंपरा को दर्शाती है।
3. अन्य मान्यताएँ (Other Beliefs)
एक अन्य प्रसिद्ध कथा भगवान कृष्ण और उनकी बहन सुभद्रा से भी जुड़ी है:
- मान्यता है कि जब भगवान कृष्ण ने अत्याचारी नरकासुर का वध किया था, तब वे अपनी बहन सुभद्रा के घर पहुँचे थे। सुभद्रा ने फूलों, मिठाइयों और तिलक से उनका स्वागत किया था। इसी घटना की याद में भी इस पर्व को मनाने की परंपरा शुरू हुई।
संक्षेप में, भाई दूज का पर्व भाई की दीर्घायु के लिए बहन के आशीर्वाद और बहन की सुरक्षा के लिए भाई के वचन का पवित्र दिन है। यह भारतीय संस्कृति में पारिवारिक रिश्तों के महत्व को दर्शाता है।
निष्कर्ष
संक्षेप में, भाई दूज का पर्व बहन के दीर्घायु के आशीर्वाद और भाई के सुरक्षा के वचन का पवित्र दिन है। यह केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति में पारिवारिक रिश्तों के महत्व को दर्शाने वाला एक सुंदर उत्सव है।


