संयुक्त राष्ट्र, 28 सितंबर 2025 – भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के 79वें सत्र में अपने संबोधन के दौरान पाकिस्तान पर तीखा हमला बोला, उसे ‘वैश्विक आतंकवाद का केंद्र’ करार दिया। उन्होंने पड़ोसी देशों से आने वाली चुनौतियों पर प्रकाश डाला और स्पष्ट रूप से कहा कि आतंकवाद को किसी भी रूप में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। जयशंकर ने वैश्विक सुधारों की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि दुनिया को एकजुट होकर आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई करनी होगी, अन्यथा इसके परिणाम सभी को भुगतने पड़ेंगे।
जयशंकर ने अपने भाषण में पाकिस्तान का नाम लिए बिना उसकी सीमा-पार आतंकवाद की नीति की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा, “पाकिस्तान की सीमा-पार आतंकवाद की नीति कभी सफल नहीं होगी। उसे किसी भी प्रकार की छूट की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। इसके विपरीत, कार्रवाइयां निश्चित रूप से परिणाम भुगतेंगी।” विदेश मंत्री ने चेतावनी दी कि आतंकवाद को प्रोत्साहित करने वाले देशों को यह ‘पीछे मुड़कर काटेगा’, और दशकों से प्रमुख अंतरराष्ट्रीय हमलों के निशान पाकिस्तान की ओर जाते हैं। उन्होंने वैश्विक समुदाय से अपील की कि आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होकर लड़ाई लड़ी जाए, क्योंकि यह किसी एक देश की समस्या नहीं बल्कि पूरी दुनिया की चुनौती है।
उन्होंने भारत की पड़ोसी चुनौतियों का जिक्र करते हुए कहा कि भारत जैसे देशों को अपने पड़ोस से लगातार खतरे का सामना करना पड़ता है, जहां आतंकवाद को राज्य नीति का हिस्सा बनाया गया है। जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र में सुधारों की मांग की, ताकि वैश्विक संस्थाएं अधिक प्रभावी और समावेशी बन सकें। उन्होंने कहा, “हम दुनिया को बेहतर बना सकते हैं,” लेकिन इसके लिए आतंकवाद, जलवायु परिवर्तन और अन्य वैश्विक मुद्दों पर सामूहिक प्रयास जरूरी हैं। साथ ही, उन्होंने पाकिस्तान से अवैध रूप से कब्जाए गए भारतीय क्षेत्र (पीओके) को खाली करने और आतंकवाद को त्यागने की मांग दोहराई।
इस भाषण पर पाकिस्तान की प्रतिक्रिया भी आई। पाकिस्तान ने यूएनजीए में ‘राइट ऑफ रिप्लाई’ का इस्तेमाल करते हुए जयशंकर के बयानों को खारिज किया और भारत पर आरोप लगाया कि वह क्षेत्रीय तनाव बढ़ा रहा है। पाकिस्तानी प्रतिनिधि ने कश्मीर मुद्दे का जिक्र किया और कहा कि भारत की नीतियां क्षेत्रीय शांति के लिए खतरा हैं। हालांकि, भारत ने पाकिस्तान की इस प्रतिक्रिया को ‘आतंकवाद की स्वीकारोक्ति’ करार दिया, क्योंकि जयशंकर ने अपने भाषण में पाकिस्तान का नाम सीधे नहीं लिया था, फिर भी पाकिस्तान ने खुद को संबोधित मानकर जवाब दिया। भारतीय अधिकारियों ने कहा कि यह पाकिस्तान की लंबे समय से चली आ रही सीमा-पार आतंकवाद की प्रथा को दर्शाता है।
यह घटना भारत-पाकिस्तान संबंधों में जारी तनाव को उजागर करती है, जहां आतंकवाद एक प्रमुख मुद्दा बना हुआ है। जयशंकर का संबोधन न केवल पाकिस्तान को चेतावनी था बल्कि वैश्विक नेताओं से आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख अपनाने की अपील भी।

